भरोसे की बात

एक नया दौर सा चल रहा है सीधा मुद्दे की बात करता हु कई लोगों को किसी न किसी व्यक्ति विशेष से परेशानी होती है और वह उससे बात करना बंद कर देता है ऐसा वह सिर्फ एक के लिए नही करता बलकि वे तमाम लोग इसमे समाहित होते है जिन्हे वह पसंद नही करता

ज़रूरी बातें इसमे से निकल कर जो आती है वह ये है कि इससे नुकासान सिर्फ़ हमारा होना है जिसे आप दूर कर रहे हो खुद से उसका क्या होना है लेकिन आप ध्यान दीजिये की आप धीरे-धीरे सब से दूर होते चले जाओगे अकेले होते जाओगे । लोग तुम से खुद दूर हो जाएगे यह कह कर की तुम्हे तो हर चीज़ से परेशानी है हमारी क्या ज़रूरत है तुम्हे । अंत मे खुद को अकेला पाओगे तुम किसी मकसद की पूरती के लिए या ज़रूरत के वक़्त कोई नही होगा साथ तुम्हारे। किसी से मन बहलाने के लिए , बाते करने के लिए, कही घूमने जाने के लिए कोई नही होगा पास तुम्हारे । हमे यह सीखना होगा कि लोगो की छोटी-छोटी गलतियों को कैसे माफ किया जाए। हम हर गलती के लिए किसी को दोशी करार नही दे सकते। हर व्यक्ति में कोई कमी ज़रूर होती है अगर ऐसा हुआ तो लोग आप के साथ भी वैसा ही करेंगे जैसा आप उनके साथ करते हो । खुद को देखो अभी क्या सब कुछ ठीक है ? क्या आप खुद को अकेला नही पाते हो ? इन सब मे आती है भरोसे की बात आप ये भी कहेंगे कि अब मुझे भरोसा नही होता लोगों पर तो मत कीजिये भरोसा और देखिये आप कितने दिन समाज मे संघर्ष कर पाते है । ये सब केवल कहने की बाते है आप को लोगो पर किसी न किस कारण से किसी मक़सद की पूर्ति के लिए भरोसे का सहारा लेना ही पड़ता है भरोसे पर तो पूरी दुनिया टीकी है जरा सोच कर देखिये । मैं ये भी नही कहता कि आप खुल के किसी का समर्थन करे या उसपर भरोसा करें समझदारी से स्तिथि को समझ कर देख परख के आप किसी पर भरोसा करें लेकिन आप का यह कहना गलत होगा कि आप किसी पे भरोसा नही करते परन्तु सच्चाई यह है कि हा आप करते हो ।

ये मैने खुद अनुभव किया है कि मैं पहले लोगों की खामियां जादा देखता था और इसके बाद मैं खुद को बहुत अकेला पाने लगा । जिसे निकलना बहुत मुश्किल होता है ।

इस पर किसी ने क्या खूब लिखा है

आहिस्ता से पढना मेरे दोस्त,एक वाक्य भी दिल में बैठ गया तो कविता सार्थक हो जायेगी:-

मैं रूठा ,
तुम भी रूठ गए
फिर मनाएगा कौन ?

आज दरार है ,
कल खाई होगी
फिर भरेगा कौन ?

मैं चुप ,
तुम भी चुप
इस चुप्पी को फिर तोडे़गा कौन ?

छोटी बात को लगा लोगे दिल से ,
तो रिश्ता फिर निभाएगा कौन ?

दुखी मैं भी और तुम भी बिछड़कर ,
सोचो हाथ फिर बढ़ाएगा कौन ?

न मैं राजी ,
न तुम राजी ,
फिर माफ़ करने का बड़प्पन
दिखाएगा कौन ?

डूब जाएगा यादों में दिल कभी ,
तो फिर धैर्य बंधायेगा कौन ?

एक अहम् मेरे ,
एक तेरे भीतर भी ,
इस अहम् को फिर हराएगा कौन ?

ज़िंदगी किसको मिली है सदा के लिए ?
फिर इन लम्हों में अकेला
रह जाएगा कौन ?

मूंद ली दोनों में से गर किसी दिन
एक ने आँखें….
तो कल इस बात पर फिर
पछतायेगा कौन ?

एक दूसरे की इज़्ज़त करना सीखें

गलतियों को नज़रअन्दाज़ करे

अहम को दूर करे

#नागेन्द्र#प्रेम#स्नेह#ख़ुशी

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

Powered by WordPress.com.

Up ↑

%d bloggers like this: