“मतलब” तेरा शुक्रिया

“मतलब” तेरा शुक्रिया

शुक्रिया जो तू है ।

तेरे होने से ही ये दुनिया चल रही है ।

बिना तेरे ये रिश्ते न होते ।

“मतलब” तू इतना बुरा नही जितना तुझे बताया जाता है ।

किसी को तूने रुलाया है मगर तूने उतना ही हसाया है जब जब तेरी पड़ी ज़रूरत तू हमेशा हर किसी के साथ रहा है ।

“मतलब” तेरा शुक्रिया,

तूने इन रिश्तों को मजबूती से पकड़े रखा है जोड़े रखा है ।

अगर तू न होता किसी के पास तो जुड़ा न होता कोई किसी के साथ ।

“मतलब” तेरा शुक्रिया

था बैठा अकेला मुसाफ़िर ढूंढ रहा साथ किसी का तू तो था ही नही उसके पास कैसे कोई होता साथ उसके ।

है जिसके पास तू खिलता सदा वो सब के साथ । है काबिलयत तेरी इतनी जाने और अनजाने कर जाता है काम अधूरे सब के पूरे तू।

“मतलब” तेरा शुक्रिया

जुड़ा हर इंसान एक दूसरे से हर मोड़ पर मिल जाता है तू। तेरी ही मेहनत है इंसानी जीवन को पार लगाने में ।

“मतलब” तेरा शुक्रिया

तेरे है प्रकार कई, रूप कई, रंग कई “ मतलब” तू रहता है कहा? किसी को है जरूरत मन की पूर्ति के लिए, किसी को है तन की पूर्ति के लिए, किसी को है दुसरो से दूसरों की पूर्ति के लिए “मतलब” वही है जहाँ हो पूर्ति मतलब की ।

“मतलब”तेरा शुक्रिया ।

#नागेन्द्र#प्रेम#स्नेह#ख़ुशी

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