उलझन

लो फिर वो वक़्त आया वो जाने को थी मैं ठहरा सा था । वो अलविदा कहने को थी,मैं रुक जाने को था। उसे समझ ना थी,मैंने न समझाना चाहा । उसे एहसास न हुआ, मैं ख़ामोश रह गया । वो बेपरवाह आज़ाद परिंदा थी, मैं उसका ठिकाना न हुआ । वो तो पहले से […]

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सफ़रनामा

यह किसी के साथ भी हुआ होगा अक्सर यह देखने में आता है कि रेल में यात्रा के दौरान महिलायें बैठने के लिए सीठ का जुगाड़ कर ही लेती है मैं अपने घर के लिए वर्धा से दुर्ग के लिए सुबह 9.38 की ट्रेन से चल पड़ा । मुझे मेरी सीठ मिल गई ट्रेन समय […]

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हम-तुम

बंद कमरे में तन्हाई के सन्नाटे में सिमटा हुं, ख्वाब लफ़्ज़ों में बयां नहीं होते इश्क़ के वो पल सीने में पल रहे है कभी सोता हुं कभी जागता हुं कभी इन्ही पंक्तियों में तुम्हें ढूंढा करता हुं, उकेरा करता हुं फ़रेबी ख्वाबो से तुम्हें जो सच से पीछा छुड़ाती है जो सच मेरे भीतर […]

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ऐसे-जैसे

मुझ से तेरी जुदाई जैसे धरती से सूरज की किरणों की बिदाई, मेरा प्यार टूट कर अमर हुआ ऐसे जैसे आकाशगंगा में सितारे, मेरा ईश्क़ तेरे लिए दिल में ज़िन्दा है ऐसे जैसे अनंत हवाओं का बहना, तेरी जुदाई का तपिश ऐसा जैसे जलती भट्टि में अंगारे, हर रात सपने में आती हो ऐसे जैसे […]

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बेपरवाह

बेपरवाह भी था कभी परवाह की न किसी ने उसकी परवाह नकारा गया हर तफर से उसे सब की करता परवाह सब का रखता ख़याल सब को देता उम्मीद सब से करता प्यार थी आदत परवाह करने की उसकी भी इस आदत का किसी ने किया न ऐतबार कर खराब अपनी आदत परवाह जग से […]

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जाती चयन

सभी ये जानते है और कहते भी है की, एक बच्चे का या किसी व्यक्ति के जीवन के फैसले वो ख़ुद ही तय करेगा जैसे कि, अगर वह डॉक्टर,शिक्षक, अभिनेता आदि बनना चाहता है तो इसका चयन उससे खुद करने देना चाहिए इसे फरक नही पढ़ना चाहिए कि उसके परिवार या खानदान में पहले से […]

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वो पल

डूबते सूरज के साथ एक ख़्वाब जन्म लेता है वो ख़्वाब पनपते है, वो ख़्वाब जलते है अगले भोर सुनहरी किरणों की लहर के साथ संध्या आस है तो सुबह उमंग किरणें सूरज की जब पड़े धरती पर , हो शाम या सुबह की उम्मीद से भरा होता है वो पल करलो कैद मुठ्ठी में […]

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ज़िकर तेरा

Zikar tera labo me mere harpal hai aajkal Aaj kal kyu na jaane lagte sab begane, Aane se tere naye khwaab mere hogye purane Hogye zamane ke log raakh dekh tere mere afsaane, Fasane ban-te jaye mere sang tere Tere likhta jaaou yaad ko bunta jaou khwaab ko mere, Mere hal-e-dil me dhadak si kr […]

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अटका अटका

यादो का पैहरा रहता हमेशा दिल के दरवाज़े पे मेरे, जब-जब इन्हें खोलता हुँ यादों की ठंडी हवा सीधे सिर चढ़ जाती है। कशमकश के भवर में फसा हुँ समझ मेरी उलझन बन गई है सुलझाना बड़ा कठिन लगता है मेरी समझ इसके आगे फिकी पड़ गई है । शब्दो मे बेचैनियां समा गई है […]

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मुक़ाम

शोर,शोर से दूर है सन्नाटे में खामोशी है चांद के निचे जगमगाते तारो सा शैहर खुसपुसाते पत्तो से टकराके गुज़रती हवा बैठा हुँ लिए साथ ख़्वाब एक रात पुरानी ना कोई फ़िकर, ना कोई डर सिर्फ इन्तज़ार लिए मुकाम की ओर जा रहा हुँ #नागेन्द्र#प्रेम#स्नेह#ख़ुशी

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